

जालंधर (TES): आज महाशिवरात्रि का पावन दिन है। इस दिन देवों के देव महादेव की खासतौर पर पूजा व व्रत करने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि भगवान शिव प्रसन्न होकर अपने भक्तों के सभी दुख-दर्द दूर कर देते हैं। लोग इस खास अवसर पर शिव जी अलग-अलग मंदिरों में दर्शन करने जाते हैं।
वहीं देशभर में शिव जी के कई मंदिर स्थापित है। मगर इनमें से 12 ज्योर्तिंलिंगों का विशेष महत्व है। चलिए आज इस आर्टिकल में हम आपको शिव के 12 ज्योर्तिंलिंगों के बारे में बताते हैं…
सोमनाथ धाम
भगवान शिव का ये पवित्र स्थान गुजरात में स्थित है। कहा जाता है कि इसी स्थान पर चंद्र देव ने शिव जी की पूजा की थी।


मल्लिकार्जुन धाम
ये पूजनीय स्थान तमिलनाडु में स्थित है। कहा जाता है कि इसी स्थान पर कार्तिकेय ने घोर तपस्या की थी।


महाकालेश्वर धाम
महाकालेश्वर धाम उज्जैन में शिप्रा तय पर विराजमान है। कहा जाता है कि इसी पवित्र स्थान पर देवताओं ने भगवान शिव जी की पूजा की थी।


ओंकारेश्वर धाम
भगवान शिव का ओंकारेशवर ज्योर्तिंलिंग मालवा में नर्मदा की धारा के बीच मान्धाता पर्वत पर स्थित है। ज्योतिषशास्त्र अनुसार, विन्ध्य के कष्ट हरने के लिए भगवान आशुतोष यहां आए थे।


केदारनाथ धाम
ये उत्तराखंड में स्थित चार धाम की यात्रा का एक महत्वपूर्ण मंदिर है। कहा जाता है कि इसी स्थान पर नर व नारायण ऋषि ने तप किया था।


भीमाशंकर धाम
भगवान शिव का ये ज्योर्तिंलिंग असम के कामरूप में ब्रह्मपुत्र के तट पर विराजमान है। कहा जाता है कि इसी स्थान पर महादेव ने भीम नामक असुर का संहार किया था।


विश्वेश्वर धाम
ये ज्योर्तिंलिंग काशी में बाबा विश्वनाथ के मंदिर में स्थित है। कहा जाता है कि प्रलयकाल के समय भगवान शिव ने अपने त्रिशूल पर काशी को स्थान देकर बचाया था।


त्रयम्बकेश्वर धाम
ये पूजनीय स्थान वासिर महाराष्ट्र में गोमती तट स्थित है। इसी स्थान पर गौतम ऋषि ने तपस्या की थी। कहा जाता है इस ज्योर्तिंलिंग के तीन स्वरूप है जो ब्रह्मा-विष्णु, महेश नाम से जाने जाते हैं।


बैद्यनाथ धाम
यह पवित्र स्थान जसीडीह संथाल परगना (प. बंगाल) में स्थापित है। बताया जाता है कि इसी स्थान पर रावण ने कैलाश पर्वत से शिवलिंग लाकर रखा था।


नागेश्वर धाम
भगवान शिव का नागेश्वर धाम द्वारिका में स्थित है। कहा जाता है कि इसी जगह पर शिव जी ने सुप्रिय को मुक्त करने हेतु दारुक को दंड दिया था।


रामेश्वरम् धाम
बता दें, यहां पर हनुमान जी द्वारा कैलाश पर्वत से लाया गया शिवलिंग है, जिसकी स्थापना स्वयं प्रभु श्रीराम ने की थी। इसके बाद उन्होंने शिव जी की अराधना की थी।


घुश्मेश्वर धाम
यह बेरूल, दौलताबाद (महाराष्ट्र) में स्थित हैं। कहा जाता है कि इसी स्थान पर भगवान शिव घुश्मा को संतान का वरदान दिया था।






