Thursday, May 28, 2026
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मर्डर-रेप सहित जुर्म की कई धाराओं में बदलाव , जानें कितनी धाराएं हटी और किनमें हुआ क्या बदलाव

नई दिल्ली (Exclusive): लोकसभा में बुधवार को 3 बड़े क्रिमिनल लॉ बिल में बदलाव किए हैं। वर्तमान में चल रही दंड सहिताओं की धाराओं में नए विधेयकों के पारित होने बाद काफी बदलाव होगा। बता दें कि नए विधेयकों में कुछ धाराएं बढ़ाई भी गई हैं जबकि कुछ को हटा दिया गया हैं। वहीं, कुछ धाराएं ऐसी हैं जिन्हें बदल दिया गया है। चलिए आपको बताते हैं कि किन किन धाराओं में क्या बदलाव किए गए हैं।

ये धाराएं होंगी कम

बता दें कि सीआरपीसी में 484 धाराएं थीं, जिनकी जगह अब 531 धाराएं होंगी। 177 नई धाराएं बदली गई हैं और 9 नई धाराएं, 39 नई उपधाराएं जोड़ी गई हैं और 14 धाराएं हटाई गई हैं। भारतीय साक्ष्य अधिनियम में 166 धाराएं थीं जो अब बढ़कर 170 हो गई हैं और 24 धाराएं बदल दी गई हैं, दो नई उपधाराएं बढ़ाई गई हैं और 6 धाराएं हटा दी गई हैं।

वहीं, आईपीसी में 511 धाराएं थीं, जोकि अब 358 हो गई हैं। 21 नए अपराध जोड़े गए हैं, 41 अपराधों में कारावास की अवधि बढ़ाई गई है, 82 अपराधों में जुर्माना बढ़ाया गया है, 25 अपराधों में न्यूनतम सजा का प्रावधान किया गया है, 6 अपराधों में सामुदायिक सेवा पेश किया गया है और 19 धाराएं हटा दी गई हैं।

राजद्रोह, देश विरोधी गतिविधि के लिए नई धाराएं

– राष्ट्र की भलाई के खिलाफ डायनामाइट, जहरीली गैस का इस्तेमाल करने वाले को आतंकवादी माना जाएगा और इसे आतंकवादी गतिविधियों के रूप में देखते हुए सजा सुनाई जाएगी।
– नए कानून में कहा गया है कि केवल दोषी को ही दया याचिका का अधिकार होगा, दूसरों को नहीं। जिसे अपराध पर पछतावा भी नहीं है, उसे दया का कोई अधिकार नहीं है।
– ट्रायल इन एब्सेंटिया के प्रावधान के तहत अपराधियों को सजा मिलेगी और उनकी संपत्ति भी जब्त होगी.
– भीड़-भाड़ और हंगामा करने पर लगने वाली धारा 144 की जगह धारा 187 लागू होगी।

बालात्कार की ये होंगी धाराएं

– 18 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं पर यौन उत्पीड़न के प्रावधानों को POCSO अधिनियम के साथ जोड़ दिया गया है। नाबालिगों के बलात्कार के मामले में, आजीवन कारावास या मौत की सजा अनिवार्य कर दी गई है। सामूहिक बलात्कार के मामले में 20 साल की कैद या आजीवन कारावास अनिवार्य कर दिया गया है।

– प्रारंभिक जांच में मामला सही पाए जाने पर पुलिस को तीन दिन के भीतर एफआईआर दर्ज करनी होगी। जिन मामलों में सजा 3 से 7 साल के बीच है, वहां पुलिस को 14 दिन के भीतर मामला दर्ज करना होगा। रेप पीड़िताओं की मेडिकल रिपोर्ट सात दिन में देनी होगी।

– धारा 377 को हटाकर धारा 69 जोड़ी गई है, जिसमें शादी का झूठा वादा कर यौन संबंध बनाने वाले को 10 साल की सजा मिलेगी लेकिन इसे रेप की श्रेणी में नहीं माना जाएगा।

दहेज हत्या की धारा बदलेगी

अब धारा 302 छिनैती के अपराधों में लगाई जाएगी। इसमें दहेज हत्या में लगने वाली धारा 304 B को धारा 799 स बदल दिया गया है। इसके अलावा आत्महत्या के लिए उकसाने वाले पर धारा 306 की जगह अब धारा 106 लगेगी।

पुलिस वालों के लिए बदले नियम

– जिले और राज्यों में एक अभियोजन निदेशक होगा जो यह तय करेगा कि किसी मामले में अपील के लिए योग्यता है या नहीं।
– पुलिस की जवाबदेही तय कर दी गई है और पुलिस को गिरफ्तार किए गए लोगों की जानकारी रखनी होगी और इसके लिए एक अधिकारी को नामित किया जाएगा।
– राज्य को पीड़ित की बात सुने बिना केस वापस लेने की इजाजत नहीं होगी। साथ ही पीड़ित को 90 दिन के अंदर जांच की प्रगति की जानकारी देनी होगी।

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