

इंटरनेट और हाई टेक्नोलॉजी के साथ-साथ साइबर क्राइम के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। अपराधी क्राइम को अंजाम देने के लिए फर्जी सिम कार्ड, आधार कार्ड व अन्य डिटेल का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे अपराधों को रोकने के लिए सरकार ने एक सख्त कदम उठाया है।
सिम स्विच धोखाधड़ी तब होती है जब घोटालेबाज किसी ग्राहक के बारे में निजी जानकारी हासिल करने के लिए फोन कॉल या फ़िशिंग का उपयोग करते हैं। मगर, सरकार ने सिम स्विच नियमों में बदलाव किया है, ताकि ऐसे अपराधों को रोका जा सके।
क्या है नए नियम?
– सबसे पहले तो सरकार ने पुरानों नियमों को डिस्कंटीन्यू कर दिया है। सिम स्वेपिंग के लिए अब यूजर्स को E-KYC और KYC प्रोसेस को फॉलो करना पड़ेगा।
– लाइसेंस देने वाले को इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि ग्राहक की सिम कार्ड डेमोग्राफिक डिटेल और फोटोग्राफ मैच हो। ऐसा न करने पर उन पर प्रति दुकान 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
– सिम स्वैपिंग में लाइसेंस देने वाले को यूजर का सारा डाटा स्टोर करके रखना पड़ेगा। इसके अलावा SMS सर्विस भी सिम शुरु होने के 24 घंटे बाद एक्टिवेट की जाएगी।
-1 अक्टूबर, 2023 से लागू होने वाले नियमों में यह भी कहा गया है कि सिम कार्ड बेचने वाली मौजूदा दुकानों को भी 30 सितंबर, 2024 तक नए मानदंडों के अनुसार अपना केवाईसी करना होगा।
– कंपनियों को भी सिम बेचते समय ग्राहकों की पूरी व सही डिटेल रखनी होगी और डाटा को सुरक्षित रखना होगा।
इन नए नियमों का उद्देश्य भारत में सिम कार्ड बेचने के तरीके को सुरक्षित और मजबूत करना है। स्पैम मैसेजिंग और साइबर धोखाधड़ी को रोकने के लिए, DoT नियमों का उद्देश्य थोक खरीद सिम कार्ड के दुरुपयोग को रोकना भी है। ऐसे कई मामले सामने आए है, जिसमें अपराधी किसी तरह लोगों की सिम डिटेल्स हासिल कर लेते हैं। ऐसे में इससे साइबर क्राइम को रोकने में मदद मिलेगी।



