

जब ग्रहों के राजा सूर्य कन्या राशि में प्रवेश करते हैं, तब महालय पक्ष में पितरों को बहुत तेज भूख लगती है। इसलिए पितर धर्मराज के निर्देश पर धरती पर आत्मा तृप्ति के लिए आते हैं। यही वजह है कि पितृपक्ष के दौरान लोग श्राद्ध, पिंडदान व तर्पण आदि जैसे कार्य करते हैं। पितृपक्ष के दौरान दान करना भी बहुत शुभ माना जाता है।
ऐसा कहा जाता है कि इस दौरान अगर कोई भूखा-प्यासा घर के दरवाजे आए तो उसे खाली नहीं लौटाना चाहिए। आइए जानते हैं कि पितृपक्ष के दौरान दान में क्या देना चाहिए और इसमें कौन से दान महादान के समान होते हैं…
अन्न का दान
पितृपक्ष में अन्न जैसे गेहूं और चावल का दान महादान के सामान माना गया है। इससे पितरों को तृप्ति मिलती है।
चांदी का दान
पितृ पक्ष में चांदी की वस्तु दान करने से आशीर्वाद मिलता है। ऐसी मान्यता है कि चांदी का दान पितरों की आत्मा को शांति देता है लेकिन इसके साथ भोजन, पानी देना ना भूलें।
काले तिल का दान
मान्यता है कि पितृपक्ष में काले तिल का दान तो अवश्य करना चाहिए। इससे भी पितृ खुश होते हैं और आप सदा रोगमुक्त रहते हैं।
गुड़ का दान
गुड़ का दान पितरों की आत्मा को शांति देता है और साथ ही घर में सुख शांति बनी रहती है। मान्यता है कि गुड़ का दान करने से घर का कलेश भी दूर होता है।
नमक का दान
कहा जाता है कि नमक का दान किए बिना पितृपक्ष कभी भी संपन्न नहीं होते। ऐसे में दान करते समय एक पैकेट नमक जरूर ले लें।
जूते और चप्पल
ऐसा माना जाता है कि जूते चप्पल का दान आने वाली विपत्ति से बचाता है। वहीं, अगर आपकी कुंडली में कोई दोष है तो वो भी इससे दूर हो जाएगा।
गाय के घी का दान
हिंदू धर्म में पूजनीय गाय माता घी व हरे चारे का दान करना भी फलदायी होता है। इससे घर में खुशहाली आती है और सुख शांति बनी रहती है।




